कठुआ रेप मर्डर केस में RPC के तहत आरोपियों को मिली सज़ा, जानिए क्या है रणबीर दण्ड संहिता

पिछले साल जम्मू-कश्मीर के कठुआ में हुई रेप और मर्डर की घटना पर कल 380 दिन के बाद 10 जून फैसला सुनाया गया। इस फैसले में 8 साल की बच्ची के साथ रेप करने वाले कुल सात में से 6 आरोपियों को दोषी करार दिया है जबकि एक को रिहा कर दिया गया। इनमें से तीन को उम्रकैद के साथ चार -चार लाख रुपए (सांझी राम, दीपक खजुरिया और परवेश) और अन्य तीन (तिलक राज, आनंद दत्ता और सुरेंद्र कुमार) को सबूत मिटने में दोषी पाए जाने पर 5-5 साल और 50 -50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

आपको बता दें, अनुच्छेद-370 के तहत जम्मू-कश्मीर एक स्वायत्त राज्य है और भारतीय संघ के सभी कानून इस राज्य में सीधे लागू नहीं होते। इसके चलते राज्य में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की जगह रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) लागू होती है। कठुआ मामले की सुनवाई पंजाब में होने के बावजूद अपराध का क्षेत्र जम्मू-कश्मीर होने के कारण आरपीसी के तहत सज़ा दी गई।

क्या है आरपीसी?

आरपीसी मतलब रणबीर पीनल कोड या रणवीर दंड संहिता। बता दें कि आईपीसी यानी इंडियन पीनल कोड या भारतीय दंड संहिता के प्रावधान जम्मू और कश्मीर राज्य को छोड़कर देश के सभी राज्यों में लागू होते हैं।

दरअसल, जम्मू और कश्मीर राज्य में आईपीसी की जगह आरपीसी लागू होता है जिसे भारतीय दंड संहिता के तर्ज पर ही तैयार किया गया था।

चूंकि संविधान का अनुच्छेद 370 जम्मू और कश्मीर राज्य को स्वायत्ता का दर्जा देता है, इसलिए भारत संघ के सभी क़ानून इस राज्य में सीधे लागू नहीं होते। यही वजह है कि जम्मू और कश्मीर में आईपीसी की जगह आरपीसी लागू है।

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