भविष्य में जेनेटिक इंजीनियरिंग से ‘सुपर ह्यूमन’ को जन्म देना संभव है?

न्यूज़ डेस्क : आप सभी ने बॉलीवुड फिल्म ‘कृष 3’ जरुर देखा होगा। इस फिल्म का जिक्र इसलिए क्योकि इस फिल्म में आपने काल नामक वैज्ञानिक को जेनेटिक इंजीनियरिंग द्वारा मानव और जानवरों के मेल से सुपर मानव ‘मानवर’ का आविष्कार किया था। आज का हमारा यह आर्टिकल जेनेटिक इंजीनियरिंग से ही जुड़ा हुआ है। हमारे पास ऐसी तकनीक आ चुकी है, जिससे आनुवांशिक कमियों को दुरुस्त किया जा सकता है और सुपर ह्यूमन जैसी अवधारणा को सच साबित किया जा सकता है। वैज्ञानिक लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं। यही नहीं विज्ञान तेजी से इस दिशा में भी आगे बढ़ रहा है जिससे कटे हुए मानव अंगो को पुनः उगाया जा सके।
‘जेनेटिक इंजीनियरिंग’ या जीवन को मनचाहे अंदाज में बदलने की चाह कोई नई बात नहीं है। हमेशा से इंसान की यह चाहत रही है। अतीत में हम लोग इस देश में कहीं आगे तक जा चुके हैं।
 

महाभारत में भी जेनेटिक इंजीनियरिग के उदाहरण

आपको महाभारत में भी ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे। उस काल में भी जब राजा चाहता था कि उसकी पत्नी किसी महान इंसान द्वारा गर्भवती हो तो फिर वह ऐसे किसी व्यक्ति को चुनता था जो सर्वगुण सम्पन्न हो। आपको शायद यकीन न हो लेकिन व्यास ने महाभारत की पहली पीढ़ी की सारी रानियों को गर्भवती किया था। यह क्रिया ‘नियोग’ कहलाती थी।
यह कुछ उसी तरह की बात है कि जैसे पशुपालन में आप बेहतर नस्ल पैदा करना चाहते हैं। आज हर मां-बाप की इच्छा होती है कि वे ऐसी संतान पैदा करें, जो उनसे एक कदम आगे हो। यह एक स्वाभाविक इच्छा है और ऐसा होना भी चाहिए।
इसके लिए हमारे पूर्वजों ने एक पूरी प्रक्रिया तैयार की थी, जिसमें गर्भाधान के पहले से लेकर गर्भधारण के दौरान तक, साढ़े नौ – दस महीने, आपको क्या करना चाहिए, एक बच्चा अपनी मां के गर्भ में कैसे रहे, इसको लेकर हमारे यहां हर दिन के लिए बाकायदा स्थापित परंपराएं और प्रक्रियाएं हैं ताकि सेहत, कल्याण और प्रतिभा के लिहाज से एक बेहतर बच्चा पैदा हो सके।
लेकिन आज इस वैज्ञानिक युग में हमने उन सारी प्रकियाओं को अनदेखा कर दिया है और अब हम बायोटेक्नोलॉजी की मदद ले रहे हैं। बुनियादी तौर पर आप आप पीढ़ी दर पीढ़ी वंश से आने वाले एक से प्रभावों को निकालकर उसमें नई विशेषता भरने की कोशिश कर रहे हैं। है न? खैर, वह दिन अब दूर नहीं जब आप हकीकत में उस संसार को जियेंगे जहाँ जेनेटिक इंजीनियरिंग से आप ‘सुपर ह्यूमन’ जैसी संकल्पना को अपने आस पास देखेंगे। कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि भविष्य में आप एक सुपर ह्यूमन होंगे।

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