मृत्यु पर विजय पाने की तकनीक का नाम है क्रायोनिक्स, जानिए क्यों खास है यह तकनीक

न्यूज़ डेस्क : मृत्यु एक ऐसा शब्द जिसके नाम में ही दहशत छिपी है। इंसान अगर किसी शब्द के आगे हैरान है तो वह है मृत्यु। मृत्यु पर विजय पाने के प्रयास में इंसान लगातार नये नये आविष्कार करते जा रहा है। ऐसी ही एक तकनीक का नाम है क्रायोनिज्म। वर्तमान मे ऐसे व्यक्तियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है जो अपने शरीर को क्रायोजेनिकली संरक्षित रखने के लिये कंपनीयों को बड़ी राशि प्रदान कर रहे है। उन्हे मृत्यु के पश्चात भी भविष्य मे पुनर्जीवन की आशा है।
 

क्या है क्रायोनिक्स तकनीक :

क्रायोजेनिक तकनीक को दरअसल ‘निम्नतापकी’ कहा जाता है, जिसका ताप -0 डिग्री से -150 डिग्री सेल्सियस होता है। ‘क्रायो’ एक यूनानी शब्द ‘क्रायोस’ से बना है, जिसका अर्थ ‘बर्फ जैसा ठण्डा’ है। यह तकनीक विज्ञान फंतासी कहानियों से उपजी है जिसमें शरीर को भविष्य मे पुनर्जीवन की आशा मे संरक्षित रखा जाता है। वर्तमान विज्ञान अभी इतना विकसीत नही है कि वह इन हिमीकृत शरीरों को पुनर्जीवित कर सके। इसके बावजूद अबतक 350 व्यक्तियों को हिमीकृत किया जा चुका है और 3000 व्यक्तियों ने अपने शरीर को हिमीकृत करवाने के लिये आरक्षण करवाया हुआ है। हिमीकरण कर शरीर के संरक्षण का समूर्ण व्यवसाय संपूर्ण विश्व मे सिर्फ तीन कंपनीयों 1- क्रायोनिक्स इंस्टीट्युट 2- अल्कार फ़ाउंडेशन 3- क्रायोरसके द्वारा नियंत्रित होता है। कुछ अन्य और भी कंपनीयाँ है जो शरीर का हीमीकरण कर इन कंपनीयों के शरीर संरक्षण केंद्र मे पहुचाने का व्यवसाय करती है।
 

क्रायोजेनिक्स संकल्पना

1964 मे वैज्ञानिक और लेखक राबर्ट एटीन्गर (Robert Ettinger) ने एक 62 पृष्ठ का एक घोषणा पत्र प्रकाशित किया जिसका नाम था “द प्रास्पेक्ट आफ़ इम्मोर्टलीटी (अमरता की संभावना)”, अब यह घोषणा पत्र बढ़कर 200 पन्नो का हो चुका है और वह अब इस तकनीक से जुड़े वैज्ञानिक, नैतिक और आर्थिक पहलुओं का भी समावेश करता है। इस का आरंभ ऐसे होता है।
 

क्या है सच, कितना आता है खर्च

अत्यंत कम तापमान पर वर्तमान मे मृत व्यक्तियों के शरीर को क्षति पहुंचाये बगैर अनंत काल तक संरक्षित किया जा सकता है। अमरीका में 150 से अधिक लोगों ने अपने शरीर तरल नाइट्रोजन से ठंडा कर रखवाए हैं। इसके अलावा 80 लोगों ने सिर्फ़ अपना मस्तिष्क सुरक्षित रखवाया है। पूरे शरीर को जमा कर सुरक्षित रखने में 1,60,000 डॉलर ख़र्च हो सकता है। मस्तिष्क को सुरक्षित रखने में 64,000 डॉलर का ख़र्च आता है। रोगी इस आशा मे अपने शरीर का हिमीकरण कराते है कि भविष्य का चिकित्सा विज्ञान उनकी मृत्यु को वापिस कर उन्हे जीने का एक और अवसर देगा। इस तकनीक के समर्थक कहते है कि कुछ ऐसे जीव है जो हिमीकरण के पश्चात स्व्यं ही पुनर्जीवित हो उठते है। इन जीवो मे शामिल है : 1- आर्कटिक क्षेत्र की जमीनी गिलहरी 2- कछुये की कुछ प्रजाति 3- आर्काटीक उनी कंबल किड़ा 4- टार्डीग्रेड्स

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